रामानुजनगर।
विकासखंड रामानुजनगर अंतर्गत देवनगर मंडल में हिंदू समाज को संगठित करने एवं सामाजिक चेतना जागृत करने के उद्देश्य से एक भव्य हिंदू समागम का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में क्षेत्र के 18 समाजों के समाज प्रमुखों एवं प्रतिनिधियों को मंच पर आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, महिलाएँ, युवा एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। तत्पश्चात अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में प्रस्तुत कर्मा नृत्य एवं सुगा नृत्य ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। इसके साथ ही विद्यालय के बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन को और भी आकर्षक बना दिया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए वक्ता प्रमिला देवी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म पर दृढ़ रहना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में अन्य धर्म की ओर नहीं जाना चाहिए। उन्होंने समाज से अपील की कि सनातन परंपराओं और मूल्यों को बनाए रखते हुए अगली पीढ़ी को भी इससे जोड़ें। वक्ता विक्रमा जी ने अपने उद्बोधन में धर्मांतरण के विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार के लालच, भय या प्रलोभन में आकर धर्म परिवर्तन नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपने धर्म को स्वयं अपनाना, समझना और उसका प्रचार-प्रसार करना चाहिए, ताकि समाज सशक्त बन सके। कार्यक्रम में वक्ता श्रीमती बबीता सिंह ने महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि “यदि किसी घर में महिला न हो, तो वह घर बिखरा हुआ प्रतीत होता है। परिवार की दिशा और दशा बहुत हद तक महिला पर निर्भर करती है।”

उन्होंने कहा कि यदि परिवार की महिला सजग, सतर्क और शिक्षित होगी तो पूरा परिवार निश्चित रूप से सही दिशा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि घर-गृहस्थी, भोजन निर्माण और बच्चों की देखरेख के साथ-साथ समाज के लिए भी समय निकालें।
उन्होंने कहा कि सभी को 24 घंटे ही मिलते हैं, चाहे वह कलेक्टर हो या आम नागरिक। बच्चों को जन्म से ही अच्छे संस्कार देने, नामकरण में सकारात्मक नाम रखने तथा परिवार के साथ भोजन करने की परंपरा को बनाए रखने पर उन्होंने विशेष बल दिया। उन्होंने मोबाइल की बढ़ती लत पर चिंता जताते हुए अभिभावकों से बच्चों की मोबाइल गतिविधियों पर नियमित निगरानी रखने की अपील की। सम्मेलन के मुख्य वक्ता सिद्धिविनायक पांडेय (प्रांत बाल कार्य प्रमुख) ने अपने प्रभावशाली उद्बोधन में कहा कि आज हिंदू सम्मेलन आयोजित करने की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि समाज में मतांतरण एक गंभीर समस्या बन चुकी है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को विभिन्न प्रकार के लालच देकर और भ्रमित कर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। उन्होंने भारतीय इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत सनातन काल से हिंदू राष्ट्र रहा है, जहाँ राम और कृष्ण जैसी महान विभूतियों ने जन्म लिया। कालांतर में अरब, तुर्क और अंग्रेज आक्रांताओं द्वारा भारत को लूटा गया, मंदिरों को तोड़ा गया और हमारी संस्कृति को कमजोर करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब हिंदू अपनी पहचान बताने से डरते थे, किंतु आज भारत पुनः उन्नति के पथ पर अग्रसर है और विश्व को मानवता, संस्कृति और त्योहारों की भावना देने वाला देश बन चुका है।

उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति में बनाए गए नियम और व्यवस्थाएँ मानव को सुखपूर्वक जीवन जीने की राह दिखाती हैं। समाज को मजबूत करने के लिए किसी प्रकार के संघर्ष या युद्ध की आवश्यकता नहीं है, बल्कि आपसी सहयोग, समरसता और संगठन की आवश्यकता है। उन्होंने राजनीति से ऊपर उठकर समाज को सशक्त करने का आह्वान किया। अपने उद्बोधन के अंत में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के “पाँच परिवर्तन” विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला और समाज से इन्हें अपने जीवन में आत्मसात करने की अपील की।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मंचासीन सभी समाज प्रमुखों को श्रीफल एवं शाल भेंट कर सम्मानित किया गया। तत्पश्चात भारत माता की सामूहिक आरती संपन्न हुई। अंत में आयोजित भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणजनों ने सहभागिता की।






















































