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न्यूनतम वेतन अधिनियम के तहत वेतन देने की मांग, लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों में असंतोष
सूरजपुर। शासकीय अस्पतालों में दिन-रात स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था संभालने वाले जीवन दीप समिति के कर्मचारियों के वेतन का मुद्दा अब गरमाने लगा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने कर्मचारियों को कलेक्टर दर पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की मांग उठाते हुए स्वास्थ्य मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन दिया है। संघ ने न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के अनुरूप पात्र कर्मचारियों को उचित पारिश्रमिक दिलाने के लिए शासन-प्रशासन से ठोस पहल की मांग की है।
अस्पतालों की व्यवस्था संभालने वालों के वेतन पर सवाल
जीवन दीप समिति के अंतर्गत जिले के शासकीय अस्पतालों में विभिन्न पदों पर बड़ी संख्या में कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें डाटा एंट्री ऑपरेटर, कंप्यूटर ऑपरेटर, आयुष्मान ऑपरेटर, फार्मासिस्ट, ड्रेसर, धोबी, चौकीदार, वार्ड बॉय, आया और सफाईकर्मी सहित अन्य कर्मचारी शामिल हैं। अस्पतालों की दैनिक व्यवस्था से लेकर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने तक इन कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
इसके बावजूद वेतन वृद्धि और कलेक्टर दर के अनुरूप भुगतान का मुद्दा अब तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाने से कर्मचारियों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। संघ का कहना है कि इस विषय को पहले भी संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया जा चुका है, लेकिन कर्मचारियों को अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है।
न्यूनतम वेतन अधिनियम के तहत न्याय की मांग
संघ ने अपने ज्ञापन में संबंधित अधिकारियों के पत्रों एवं पूर्व में जारी आदेशों का हवाला देते हुए मांग की है कि पात्र कर्मचारियों को नियमानुसार कलेक्टर दर पर वेतन भुगतान किया जाए। संघ का कहना है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को उनके कार्य और लागू नियमों के अनुरूप उचित पारिश्रमिक मिलना चाहिए।
अब शासन के फैसले पर टिकी निगाहें
जीवन दीप कर्मचारियों के वेतन का मामला स्वास्थ्य विभाग और शासन के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। संघ ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र निर्णय लेने तथा वेतन भुगतान की व्यवस्था में आवश्यक सुधार करने की अपील की है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य मंत्री और शासन स्तर पर इस मांग को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं और लंबे समय से उचित वेतन की मांग कर रहे कर्मचारियों को कब तक राहत मिलती है।





















































