सूरजपुर के दौना गांव में मां के निधन के कुछ घंटे बाद शिक्षक रामधन साहू की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई। एक ही दिन मां और बेटे का अंतिम संस्कार होने से पूरा गांव शोक में डूब गई जिस बेटे ने मां को अंतिम विदाई देने के लिए अपने आंसुओं को रोक रखा था, शायद उसे भी नहीं पता था कि कुछ ही देर बाद उसकी अपनी अंतिम यात्रा भी निकल जाएगी। सूरजपुर जिले के दौना गांव में बुधवार को ऐसा हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया। सुबह मां का निधन हुआ और दोपहर में अर्थी को कंधा देने से पहले ही शिक्षक बेटे की भी मौत हो गई। कहां, बेटे अपनी मां की अर्थी को कंधा देने की तैयारी की थी, किस्मत ने उसकी अपनी अर्थी भी उसी दिन सजा दी।
एक ही आंगन से कुछ घंटों के अंतराल में दो अर्थियां उठीं, तो पूरा गांव रो पड़ा। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में इस रिश्ते की ऐसी मार्मिक कहानी सामने आई, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। मां के निधन के कुछ ही घंटे बाद शिक्षक बेटे की भी मौत हो गई। जिस बेटे को अपनी मां की अंतिम यात्रा में कंधा देना था, उसकी भी अर्थी उसी दिन उठ गई। गांव में एक साथ दो चिताएं जलती देख हर आंख नम हो गई।
सुबह मां ने ली अंतिम सांस
घटना रामानुजनगर विकासखंड के दौना गांव की है। यहां प्राथमिक शाला दौना में प्रधान पाठक के पद पर कार्यरत रामधन साहू (52) की मां की बुधवार सुबह करीब 9 बजे तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि उन्होंने घर पर ही अंतिम सांस ले ली।परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर में मातम पसरा था और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गई थीं।
अर्थी सज रही थी, तभी बिगड़ी बेटे की तबीयत
दोपहर करीब दो बजे बारिश के बीच अंतिम यात्रा की तैयारी चल रही थी। मां की अर्थी सज चुकी थी और शव यात्रा निकलने ही वाली थी। इसी दौरान रामधन साहू की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्होंने सीने में तेज दर्द और घबराहट की शिकायत की।परिजन उन्हें तुरंत श्रीनगर अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। कुछ ही घंटों के भीतर एक ही परिवार ने मां और बेटे दोनों को खो दिया।
एक साथ उठीं मां बेटे की दो अर्थियां
इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। मां और बेटे का अंतिम संस्कार एक ही दिन, पास-पास बनी अलग-अलग चिताओं पर किया गया। यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं।
रामधन पिछले साल बने थे प्रधान पाठक
रामधन साहू एक पैर से दिव्यांग थे। पिछले वर्ष पदोन्नति के बाद उन्हें सहायक शिक्षक से प्रधान पाठक बनाया गया था। वे अपने ही गांव की प्राथमिक शाला में पदस्थ थे और अपनी सादगी व कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे।सहकर्मियों के अनुसार, बुधवार दोपहर तक वे सामान्य दिखाई दे रहे थे। उनके सहयोगी शिक्षक ब्रह्मानंद दुबे ने बताया कि मां के निधन की सूचना मिलने पर वे उनसे मिलने पहुंचे थे। उस समय बातचीत के दौरान ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि उनकी तबीयत खराब है।
शिक्षक समाज में शोक
इस घटना ने पूरे शिक्षक समाज को स्तब्ध कर दिया है। सहकर्मियों और ग्रामीणों ने रामधन साहू को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि एक ही दिन मां और बेटे का यूं दुनिया से चले जाना बेहद पीड़ादायक है। दौना गांव में अब भी इस घटना की चर्चा है। हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि किस्मत ने एक परिवार की इतनी कठिन परीक्षा आखिर क्यों ली।




















































