
सूरजपुर/ खरीफ वर्ष 2026 की खेती को सफल बनाने के लिए सूरजपुर जिले में खाद एवं बीज का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है। भारत सरकार एवं राज्य शासन के निर्देशानुसार किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। उप संचालक कृषि ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में वर्तमान में खाद एवं बीज की पर्याप्त उपलब्धता है तथा किसानों को किसी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) के तहत रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैव उर्वरक, जैविक खाद और हरी खाद के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए कृषकों को संतुलित एवं सम्मानुपातिक मात्र में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित् करने संबंधी दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं।
कृषि में संतुलित उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहित करने, कृषि लागत में कमी लाने, भूमि की उर्वरता शक्ति को सुरक्षित रखने, रासायनिक उर्वरकों के साथ अन्य वैकल्पिक उपायों को बढ़ावा देने, उर्वरको के कृषि के अतिरिक्त अन्य कार्यों में उपयोग को रोकने तथा कृषकों को गुणवत्तायुक्त उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित् करने के उद्देश्य से जिले के सहकारी समितियों में गतवर्ष के पूर्ति के आधार पर 70 प्रतिशत् यूरिया एवं 78 प्रतिशत् डी.ए.पी. का भण्डारण कराया गया है एवं शेष मात्रा की आपूर्ति उर्वरक निर्माता कम्पनियों द्वारा नियमित रुप से किया जा रहा है।
किसानों को अन्य वैकल्पिक उर्वरकों अथवा नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग संबंधी जानकारी चौपालों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से दी जा रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी किसान को नैनो उर्वरक लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा और इसका उपयोग पूरी तरह वैकल्पिक रहेगा।
सहकारी क्षेत्र में जिले को 26,820 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके विरुद्ध वर्तमान तक 18,949 मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है। इनमें से 7,495 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जबकि 11,454 मीट्रिक टन उर्वरक अभी भी उपलब्ध है। कृषि विभाग द्वारा किसानों के रकबे एवं वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है ताकि सभी किसानों को समान रूप से लाभ मिल सके।
यूरिया एवं डीएपी के अतिरिक्त किसानों को एसएसपी, एनपीके तथा अन्य वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही इच्छुक किसानों को हरी खाद के रूप में ढैंचा बीज 8 किलोग्राम प्रति एकड़ एवं मूंग बीज 4 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिले में जैव उर्वरकों को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र अजिरमा, कृषि महाविद्यालय अंबिकापुर तथा चयनित किसानों के खेतों में नीलहरित काई (ब्लू-ग्रीन एल्गी) का उत्पादन कराया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार नीलहरित काई एवं हरी खाद वायुमंडलीय नत्रजन का स्थिरीकरण कर पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराती है तथा मिट्टी की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणवत्ता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं उचित मूल्य पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उर्वरक निरीक्षकों द्वारा जिले के सहकारी एवं निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। कलेक्टर सूरजपुर के निर्देशानुसार भंडारण एवं वितरण व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उर्वरकों के भंडारण, वितरण या विक्रय में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत कठोर प्रशासनिक, कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाकर बेहतर उत्पादन एवं भूमि की उर्वरता बनाए रखने में सहयोग करें।




















































